जब तक नागरिकों के जीवन मे राष्ट्रहित का भाव नहीं आएगा , तब तक राष्ट्र की सुख समृद्धि संभव नहीं । सम्पूर्ण समाज , सम्पूर्ण राष्ट्र और उसका कण कण मेरा है , ऐसी भावना से ओतप्रोत वैचारिक मानसिक क्रांति की आज आवश्यकता है । एक देश और एक समाज का पूर्ण एकात्मक भाव प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में उत्पन्न करना होगा । भावना और विचारो मे ऐसी सर्वांगीण क्रांति लाने के लिए ही अपना संघ कार्यरत है ।
----- प. पु. श्री गुरुजी
----- प. पु. श्री गुरुजी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें