शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

स्वामी विवेकानंद 

महान चीजे महान बलिदान के द्वारा ही हो सकती है।  बहादुरों , अपना कर्तव्य पूरा करों।  प्रसिद्धि , स्वार्थ , तेरा - मेरा या ऐसी किसी भी व्यर्थ बातों को भूलकर , संघठन में रहकर अपने कर्तव्य , अपने कार्य को पूर्ण करो।  ध्यान रहे  जब घांस को आपस में जोड़कर रस्सी बनाई जाती है तब इस रस्सी में इतनी शक्ति होती है कि  पागल हाथी को भी बाँधा जा सकता है।  
प.  पु.  डॉक्टरजी 

हिन्दू जाति  का सुख ही मेरा और मेरे कुटुंब का सुख है।  हिन्दू जाति  पर आनेवाली विपत्ति हम सभी के लिए महासंकट है और हिन्दू जाति  का अपमान हम सभी का अपमान है , ऐसी आत्मीयता की वृत्ति हिन्दू मात्र के रोम रोम में व्याप्त होनी चाहिए , यही तो है राष्ट्रधर्म का मूल मंत्र।  
प.  पु.  डॉक्टरजी 

मी संघाचा स्वयंसेवक होतो असे म्हणण्याची पाळी  आपल्या जीवनांत येऊ देऊ नका , जो पर्यंत जिवंत आहोत , तो पर्यंत स्वयंसेवक राहू . 
गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर

सज्जन लोगो की संगती उतनी ही अच्छी है जैसे इत्र की दुकान पर जाना, आप इत्र ख़रीदे या ना ख़रीदे पर इत्र की सुंगध  को रोक नहीं सकते। 
प.  पु.  गुरूजी 

सामर्थ्य , ज्ञान , चारित्र्य  और वीरव्रत का प्रेरणा स्थान , संतो का वैराग्य और शूरो  के रक्त  से पावन हुआ , धनुर्धारी अर्जुन के रथ पर गौरव से लहराने वाला , छत्रपति शिवजी महाराज का प्राणप्रिय ऐसा परम पवित्र भगवा ध्वज अपना गुरु है।