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शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

 अखंड भारत मात्र एक विचार न होकर विचारपूर्वक किया हुआ  संकल्प है।  कुछ लोग विभाजन को पत्थर रेखा मानते है।  उनका ऐसा दृष्टिकोण सर्वथा अनुचित है।  मन में मातृभूमि  के प्रति उत्कट भक्ति न होने का यह परिचायक है।  

----  पंडित दीनदयाल उपाध्याय 

रविवार, 26 जुलाई 2020


जिस राष्ट्रीय प्रतिक को लेकर वेदकाल से आज तक हम स्फूर्ति पाते रहे , जिसमे सदियों के उत्थान पतन के रोमांचकारी क्षणों की गाथाएं गुम्फित है , जिसमे त्यागी , तपस्वी , पराक्रमी , दिग्विजयी , ज्ञानी , ऋषि मुनि , सम्राट , सेनापति , कवी , साहित्यकार , सन्यासी और असंख्य कर्मयोगी के चरित्रों का स्मरण अंकित है , जहाँ दार्शनिक उपलब्धियों के साथ जीवन होम करने के असंख्य उदहारण हमारे स्मृति पटल पर नाच उठते है , यह परम पवित्र भगवा ध्वज ही हमारी अखंड राष्ट्रीय परम्परा का प्रतिक बनकर हमारे सामने उपस्तिथ होता है।

 -----  पंडित दीनदयाल उपाध्याय