छोटी - छोटी बातों को नित्य ध्यान रखे। बूँद बूँद मिलकर ही बड़ा जलाशय बनता है। एक - एक त्रुटि मिलकर ही बड़ी - बड़ी गलतियां होती है , इसलिए शाखाओं में जो शिक्षा मिलती है , उसके किसी भी अंश को नगण्य अथवा कम महत्त्व का नहीं मानना चाहिए।
---- प. पु. श्री गुरूजी
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