हिन्दू राष्ट्र के परम वैभव के साधन स्वरूप धर्म का संरक्षण और उसके लिए हिंदुओं की विजयशालिनी संगठित कार्य शक्ति अर्थात इस सम्पूर्ण हिन्दू समाज की सुसंगठित एवं अनुशासित अवस्था को आधार देना ही संघ कार्य है ।
----- श्री दत्तोपंत ठेंगडी जी
रविवार, 2 अगस्त 2020
जो धर्म का वध करता है उसी का धर्म भी नाश करता है और जो धर्म का रक्षण करता है उसी का धर्म भी रक्षण करता है ।
------- युधिष्ठर(महाभारत)
धर्म मे ही भारत की जीवन शक्ति निहित है और जब तक यह हिन्दू जाति अपने पूर्वजो की इस विरासत को नहीं भूलती तब तक विश्व की कोई शक्ति इसका नाश नहीं कर सकती ।
------- स्वामी विवेकानंद
धर्म से ही धन , सुख सबको मन वांक्षित पदार्थ प्राप्त होते है , इसलिए संसार मे धर्म ही सार वस्तु है ।
----- अरण्यकांड (रामचरितमानस)