किसी भी आंदोंलन में साधारण जनता, कार्यकर्ता के कार्य का उतना ख्याल नहीं करती , जितना की उसके व्यक्तिगत चरित्र का । इसलिए हमारी चादर इतनी साफ रहे कि हमारे चरित्र मे ढूंढने से भी दोष या कलंक का छीटा तक न मिले ।
------ प. पु. डॉ. हेडगेवार जी
------ प. पु. डॉ. हेडगेवार जी
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