सोमवार, 3 अगस्त 2020

हिन्दू राष्ट्र के परम वैभव के साधन स्वरूप धर्म का संरक्षण और उसके लिए हिंदुओं की विजयशालिनी संगठित कार्य शक्ति अर्थात इस सम्पूर्ण हिन्दू समाज की सुसंगठित एवं अनुशासित अवस्था को आधार देना ही संघ कार्य है ।
----- श्री दत्तोपंत ठेंगडी जी 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें