शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर

सज्जन लोगो की संगती उतनी ही अच्छी है जैसे इत्र की दुकान पर जाना, आप इत्र ख़रीदे या ना ख़रीदे पर इत्र की सुंगध  को रोक नहीं सकते। 

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