स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा। महान उपलब्धियां कभी भी सरलता से नहीं मिलती। कमजोर ना बने, शक्तिशाली बनें । आपका लक्ष्य किसी जादू से नहीं पूरा होगा, बल्कि आपको ही अपना लक्ष्य प्राप्त करना पड़ेगा
------------------- लोकमान्य तिलक जी
देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमें हर प्रकार का त्याग करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।"