सत्य न छूटे; स्पष्टवादिता में कमी न होने पावे, कार्य न छोड़ा जाए और सत्यकथन में शिष्टता, सभ्यता और औचित्य को तिलांजलि न दी जाए।
---------- गणेश शंकर विद्यार्थी जी
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